पकड़ते ही सांप ने दिया 80 बच्चों को जन्म, 30 को खुद मां ने खा लिया


-शीघ्र ही इसकी सूचना स्नैक सेवर बापी दा को दी गई। सहयोगी प्रकाश रवानी वहां पहुंचे और सांप को पकड़कर बापी दा के घर लाया, जहां कुछ ही देर के बाद सांप ने बच्चों को जन्म दिया। 



धनबाद(झारखंड)।शनिवार को एक घर में निकले सांप को पकड़ने गए स्नैक सेवर ने जैसे ही सांप पकड़ा, उसने बच्चे देना शुरू कर दिए। एक-एक करके लगभग 80 बच्चे कुछ ही देर में पैदा हुए। खतरनाक रसैल वायपर प्रजाति का सांप अंडों के बजाय बच्चे देता है। बच्चों के जन्म के बाद मादा सांप ने अपने ही 30 बच्चे खा लिए। बाद में उसे अलग करके 50 सपोलों के साथ जंगल में छोड़ा गया। ज्यादा बच्चे देने के बाद लगी भूख में अक्सर अपने बच्चे खा लेती है सांप की ये प्रजाति....

शनिवार को सांप को पकड़ने वाले बापी दा ने बताया कि हमने मादा सांप को जैसे ही हाथों से पकड़ा वो बच्चों को जन्म देने लगी। हमने उसे कुछ देर के लिए छोड़ दिया। इतने में मादा रसैल वायपर ने 80 बच्चे दिए और अपने ही 30 बच्चों को खा लिया। इसे देखते हुए उसे बच्चों से अलग किया गया। फिर शेष बचे करीब 50 बच्चों और मादा रसल वायपर को जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया।



सबसे पहले एक महिला ने देखा था यहां सांप...
- विशुनपुर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के निकट नीलकंठ महतो के बगान में एक महिला ने सांप को देखा।
-बच्चों को उसकी माँ से बचाने के लिए उसे बच्चों से अलग किया गया। बच्चों को एक रेत से भरी बाल्टी में रखा गया।
-रेंजर गोरखनाथ की मौजूदगी में शेष बचे करीब 50 बच्चों और मादा रसेल वायपर को जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया।
- रसैल वायपर भारत के सबसे खतरनाक सांपों में से एक है, जिसका जहर खून को जमा देता है। अगर इसके काटने से व्यक्ति बच भी गया तो वो अंग काटना पड़ता है, जहां सांप ने डंसा होता है।
- रसैल वायपर प्रजाति के साप अंडे नहीं देते। बल्कि ये सीधे ही बच्चों को जन्म देते हैं। वो भी एक बार में 50-60 से भी ज्यादा।
-रसैल वायपर सबसे अधिक पंजाब में मिलता है। इसे जाड़ा सांप, दबोया या घोणस के नाम से भी जानते हैं। रसैल नाम इस पर वैज्ञानिक अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक रसैल के नाम पर पड़ा है।
-यह सांप वैसे तो स्वभाव से शर्मीला होता है, मगर छेड़े जाने पर काट लेता है। इसका जहर खून को थक्कों में बदल देता है।

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